इन्तेजार बंद कीजिये – An Inspirational Story In Hindi

John Albert Johnson

John Albert Johnson

Friends, प्रत्येक व्यक्ति से उपेक्षित ,गरीबी में पैदा हुआ, अभावों में पला बड़ा,मित्रों से रहित एक मनुष्य था | जिसे शिक्षा प्राप्त करने तक का अवसर न मिल सका | उसकी उन्नति के मार्ग में निरंतर बाधाएँ ही बाधाएँ थी, परन्तु उसका निश्चय द्रण ,संकल्प अटूट बना हुआ था, और उसने संसार को दिखला दिया की द्रण निश्चयी आत्मा में कितना बल होता है | उसने यह सिद्ध कर दिया की कार्य की सफलता महान पुरुषों के ही अंत : करण में होती है ,उपकरणों या साधनों में नही |

यह व्यक्ति था जॉन ए. जॉनसन ,जिसने मिनेसोटा का गवर्नर बनने के बाद कहा था की – “ मैं जिस कस्बे में पैदा हुआ था ,उसी में मैंने सर्वोत्तम उन्नति करने का द्रण निश्चय कर लिया था | अपनी दशा बदलने का और लोगों की दशा सुधारने का, उसी द्रण निश्चय के बलबूते पर मुझे यह सफलता मिली है |”


Stop Waiting – An Inspirational Story In Hindi


मिनेसोटा में शायद सहस्त्रों नवयुवक तथा नवयुवतियाँ मौजूद थे ,जो यही शिकायत करते रहे की उन्हें उन्नति का कोई अवसर ही नही मिला ,इस कारण जीवन में प्रगति नही कर सके | पर किसी प्रकार का कोई सरल अवसर न होने पर जॉन ए जॉनसन ने अपना मार्ग स्वयँ बना लिया था | सफलता अवसर में नही बल्कि व्यक्ति में होती है |

ठीक इसी तरह एक व्यक्ति की माँ लोगों के कपड़े धोती थी | और आठ वर्ष की अवस्था में ही उसने माँ से लोगों की सेवा का काम छुडा दिया | गाँव के स्टोर में वह दिन-भर नौकरी करता था और सायंकाल एक स्थानीय प्रेस में चिट्ठियाँ और प्रूफ लाने-ले-जाने का काम करता था | हर प्रकार का त्याग और बलिदान कर उसने माँ को दूसरों की सेवा से अंततः मुक्त कराया | वह भी तेरह वर्ष की उम्र में | अपने पांच भाई – बहनों के भोजन,वस्त्र तथा शिक्षा का भार उसने अपने ही कन्धों पर उठाया | उसके जीवन – चरित्र में ये सभी विवरण अत्यंत महत्वपूर्ण है | आभावों के कारण उसे घोर संघर्ष का सामना करना पड़ता था ,पर उसने साहस तथा आत्मनिर्भरता से कभी मुँह नही मोड़ा | हिम्मत हारना तो वह जानता न था | कठिनाईयों के बीच अपने जीवन को ऊँचा उठाने का अवसर उसके पास था , फिर भला बाधाओं से उसे क्या भय हो सकता था ?


An Inspirational Story  In Hindi


उसने सोच लिया था –“की मुझे एक सफल और बड़ा आदमी बनना है और अपनी परिस्थितियों में बदलाव लाना है |” शीतकाल में जब हिमपात होता था और कपड़ो की कमी की वजह से वह ठीठुरता – काँपता डियूटी पर जाता और परिवार का बोझ उसके कोमल कंधो को दवा रहा होता तब भी वह क्षण मात्र के लिए भी विचलित न होता | वह आगे आगे बढता चला गया | उसका द्रण निश्चय ही उसे आगे बढाने को प्रोत्साहित करता रहता | उसने अवसर की प्रतीक्षा कभी नही की |

प्राय : कुछ लोग ऐसी ही मिट्टी के बने होते है की वे हारना नही बल्कि केवल जीतना जानते है | वे उंघते नही न ही उवासियाँ लिया करते है , अवसर की प्रतीक्षा नही करते बल्कि आगे ही आगे बढते जाते है | वे विपरीत परिस्तिथियों में भी किसी की सहायता की प्रतीक्षा नही करते बल्कि आगे बढ़कर उनसे लड़ते है | उन्हें किसी अवसर की प्रतीक्षा नही होती वह स्वयं अवसर का निर्माण करते है |

जब सिकंदर एक शहर जीत चुका तो उससे किसी ने पूछा –“यदि अवसर मिला तो क्या आप अगला शहर भी जीतेंगे ?

“सिकंदर तमतमाकर बोला – “अवसर ? अवसर ! अवसर क्या होता है ? मैं स्वयँ अवसर का निर्माण करता हूँ क्योंकि उनकी मांग हर समय हर जगह होती है |

इसलिए Friends उठिए और अपने कार्य में जी जान से लग जाइए अवसर मिलने का इन्तेजार मत करिये वल्कि अवसर का निर्माण स्वयं कीजिये | क्योंकि अवसर की प्रतीक्षा में समय खोना गलत बात है ,और धीरे धीरे यह आदत बन जाती है, और यही आदत हमें अपने लक्ष्य से दिनों दिन दूर करते जाती है | जो बाद में हमारी असफलता का कारण बनती है |

 

One Response

  1. priyanka pathak Jan 7, 2016

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